कृषि मंत्री ने बैठक के बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए स्पष्ट किया कि जिस प्रकार लाल बहादुर शास्त्री ने 'जय जवान, जय किसान' का नारा दिया, जिसे अटल बिहारी वाजपेयी ने 'जय विज्ञान' से जोड़ा, अब उसी कड़ी में प्रधानमंत्री मोदी का 'जय अनुसंधान' का मंत्र कृषि क्षेत्र में नवाचार का आधार बन रहा है। उन्होंने कहा कि गूगल जैसी वैश्विक तकनीकी दिग्गज के सहयोग से बिहार के किसानों के लिए एक ऐसी डिजिटल व्यवस्था विकसित की जाएगी, जो उनकी हर समस्या का समाधान एक ही स्थान पर प्रदान करेगी।
इस महत्वाकांक्षी योजना का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ 'Farmer ID' है। यह महज एक पहचान पत्र नहीं, बल्कि किसान का संपूर्ण डिजिटल कृषि कुंडली होगी। इसमें उर्वरक, कीटनाशक की उपलब्धता से लेकर सरकारी योजनाओं की सब्सिडी और कृषि उपज की खरीद का पूरा विवरण दर्ज होगा। सबसे क्रांतिकारी पहल Farmer ID को भूमि अभिलेखों से जोड़ना है। इससे जमीन संबंधी विवादों, जैसे परिमार्जन और दाखिल-खारिज की समस्याओं का स्थाई समाधान हो सकेगा। मंत्री ने विश्वास जताया कि इससे न केवल किसानों को दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी, बल्कि अदालतों पर से भूमि विवादों का बोझ भी काफी कम होगा।
उल्लेखनीय है कि बिहार में 96 प्रतिशत किसान लघु एवं सीमांत श्रेणी में आते हैं। ऐसे किसानों के लिए उनकी छोटी जोत ही जीवन का एकमात्र सहारा है। मंत्री सिन्हा ने जोर देकर कहा कि 76 प्रतिशत आबादी की आजीविका कृषि पर टिकी है, ऐसे में गूगल का तकनीकी मॉडल बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी साबित हो सकता है। विभाग अब गूगल द्वारा प्रस्तावित मॉडलों का गहराई से अध्ययन करेगा और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ मिलकर इसे लागू करने की रणनीति तैयार करेगा। यह कदम बिहार को आधुनिक कृषि के मानचित्र पर एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने की क्षमता रखता है।
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