कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि राज्य के 22 प्रमुख बाजार प्रांगणों का जीर्णोद्धार और आधुनिकीकरण किया जा रहा है। इनमें से 8 बाजारों का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है, जबकि शेष 14 बाजारों में निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। सरकार का विजन इन बाजारों को केवल खरीद-बिक्री का केंद्र न रखकर, उन्हें वैज्ञानिक भंडारण, मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण के हब के रूप में विकसित करना है।
मंत्री ने जोर देकर कहा कि लंबे समय से उपेक्षा का शिकार रहे इन बाजारों में अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इनमें आधुनिक गोदाम, प्रशासनिक भवन, किसान विश्राम गृह, इलेक्ट्रॉनिक तौल प्रणाली और कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाएं शामिल हैं। विशेष रूप से नाबार्ड की सहायता से वर्ष 2026-27 के लिए 46.03 करोड़ रुपये और राज्य योजना के तहत 59.23 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि स्वीकृत की गई है, जो विकास कार्यों को नई गति देगी।
इस योजना का सबसे क्रांतिकारी पहलू बिचौलियों की भूमिका को समाप्त करना है। अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे के माध्यम से किसान अब अपनी उपज की ग्रेडिंग, पैकेजिंग और सीधा विपणन कर सकेंगे। इससे न केवल कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी आएगी, बल्कि मखाना, मक्का, फल और सब्जियों जैसे बिहार के विशिष्ट उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रांडिंग भी मजबूत होगी।
विजय कुमार सिन्हा ने अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश दिया है कि सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर और उच्चतम गुणवत्ता मानकों के साथ पूरा किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार का यह कदम बिहार को कृषि निर्यात के वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के लाखों नए अवसर सृजित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
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