राजधानी पटना में इस बड़ी घोषणा के दौरान कृषि मंत्री ने जोर देकर कहा कि जल और मृदा संरक्षण ही समृद्ध कृषि की वास्तविक आधारशिला है। उन्होंने बताया कि स्वीकृत राशि का उपयोग प्रदेश के चयनित जलछाजन क्षेत्रों में मृदा संरक्षण, जल संचयन, खेत-तालाब निर्माण, मेड़बंदी, नाला उपचार, वृक्षारोपण और चेक डैम जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए किया जाएगा। इन वैज्ञानिक और पारंपरिक जल प्रबंधन विधियों के समन्वय से न केवल वर्षा जल का संचयन होगा, बल्कि भू-जल स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार होगा, जो सूखे जैसी कठिन परिस्थितियों में राज्य के किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगा।
विजय कुमार सिन्हा ने आगे कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री के जल संरक्षण और 'हर खेत को पानी' के संकल्प को धरातल पर उतारने का सशक्त प्रयास है। इस कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को केवल सिंचाई की सुविधा ही नहीं मिलेगी, बल्कि पशुपालन, उद्यानिकी और भूमि की उर्वरता में सुधार से उनकी आय के वैकल्पिक स्रोत भी विकसित होंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नया संवेग प्राप्त होगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के भारी अवसर सृजित होंगे, जिससे पलायन की समस्या पर भी अंकुश लगेगा।
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर मंत्री ने सख्त लहजे में अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि स्वीकृत राशि का उपयोग पूरी तरह से पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण और निर्धारित समय सीमा के भीतर होना चाहिए। कार्यों की नियमित निगरानी, स्थल निरीक्षण और प्रगति की गहन समीक्षा के लिए अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई है। सरकार का यह दृढ़ संकल्प है कि इस महत्वाकांक्षी योजना का अधिकतम लाभ बिहार के अंतिम छोर पर खड़े किसान और ग्रामीण परिवारों तक हर हाल में पहुंचे ताकि राज्य कृषि के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित कर सके।
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