समीक्षा के दौरान कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि मानसून की अनुकूल स्थिति बिहार के किसानों के लिए एक सुनहरा अवसर है और इसका लाभ हर हाल में अंतिम पायदान पर खड़े किसान तक पहुँचना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि राज्य में धान की नर्सरी का कार्य लगभग पूरा हो चुका है, इसलिए अब सारा ध्यान धान की रोपनी को गति देने पर होना चाहिए। इसके साथ ही, खरीफ मक्का की बुआई में भी संतोषजनक प्रगति की बात कही गई है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि विभाग का एकमात्र उद्देश्य केवल कागजी आंकड़े जुटाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक किसान को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक और अन्य आवश्यक कृषि आदान उपलब्ध हों।
मंत्री ने जिला कृषि पदाधिकारियों को अपनी कार्यशैली में सुधार लाने और नियमित रूप से क्षेत्रीय भ्रमण करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारी केवल कार्यालयों में न बैठें, बल्कि सीधे खेतों में जाकर बुआई और रोपनी की निगरानी करें। किसी भी किसान को तकनीकी समस्या आती है, तो उसका समाधान तत्काल प्रभाव से किया जाना चाहिए। बैठक में बाढ़ और जलभराव की संभावित चुनौतियों पर भी गंभीर चर्चा हुई। प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए मंत्री ने विशेष कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में किसानों को वैकल्पिक फसल प्रणालियों के बारे में जागरूक किया जाए और उन्हें तत्काल तकनीकी परामर्श दिया जाए ताकि उनकी आय पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।
विजय कुमार सिन्हा ने राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि किसानों के हितों की रक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कृषि विभाग को निर्देश दिया कि जहाँ प्रगति धीमी है, वहाँ विशेष अभियान चलाकर तकनीकी मार्गदर्शन और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। मंत्री ने अपील की है कि किसान वैज्ञानिक सलाह का पालन करें और किसी भी कठिनाई की स्थिति में सीधे अपने प्रखंड कृषि पदाधिकारी से संपर्क करें। मंत्री के इन कड़े और समयबद्ध निर्देशों से कृषि विभाग में हलचल तेज हो गई है और उम्मीद जताई जा रही है कि खरीफ 2026 में बिहार कृषि उत्पादन के नए कीर्तिमान स्थापित करेगा।
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