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बिहार के लालों ने जयपुर में गाड़ा झंडा! सबौर एग्री-इंक्यूबेटर्स के 20 स्टार्टअप्स पर हुई करोड़ों की धनवर्षा, बदल जाएगी खेती की सूरत

17 Jul, 2026 12 बार देखा गया 0 कमेंट्स
बिहार के लालों ने जयपुर में गाड़ा झंडा! सबौर एग्री-इंक्यूबेटर्स के 20 स्टार्टअप्स पर हुई करोड़ों की धनवर्षा, बदल जाएगी खेती की सूरत

बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के 20 एग्री-स्टार्टअप्स ने जयपुर में अपने नवाचारों से विशेषज्ञों को दंग कर दिया। पीएम-आरकेवीवाई योजना के तहत इन स्टार्टअप्स को 1.46 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता की बड़ी अनुशंसा मिली है।

बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर के सबौर एग्री इंक्यूबेटर्स (SABAGRIs) ने कृषि उद्यमिता के मानचित्र पर एक अमिट छाप छोड़ी है। जयपुर के चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय कृषि विपणन संस्थान (CCS-NIAM) में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में विश्वविद्यालय द्वारा इंक्यूबेट किए जा रहे 20 एग्री-स्टार्टअप्स को कुल 1.46 करोड़ रुपये (146 लाख रुपये) की ग्रांट-इन-एड प्रदान करने की महत्वपूर्ण अनुशंसा की गई है। यह उपलब्धि बिहार में कृषि नवाचार की बढ़ती शक्ति का जीवंत प्रमाण है।

14-15 जुलाई, 2026 को आयोजित इस दो दिवसीय गहन मूल्यांकन सत्र में 35 स्टार्टअप्स ने चयन एवं निवेश समिति (SIC) के समक्ष अपने क्रांतिकारी बिजनेस मॉडल और अत्याधुनिक कृषि तकनीकों का प्रदर्शन किया। समिति ने गहन तकनीकी और व्यावसायिक जांच के बाद 20 स्टार्टअप्स को स्टूडेंट ओरिएंटेशन प्रोग्राम (SOP), एग्रीप्रेन्योरशिप ओरिएंटेशन प्रोग्राम (AOP) और स्टार्टअप एग्री-बिजनेस इंक्यूबेशन प्रोग्राम (SAIP) के तहत इस भारी-भरकम राशि के लिए चुना है।

प्रस्तुतीकरण के दौरान स्टार्टअप्स ने भविष्य की खेती की एक झलक पेश की। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) आधारित स्मार्ट फार्मिंग, मखाना और रूट वेजिटेबल के मूल्य संवर्धित उत्पाद, ड्रोन तकनीक, हाइड्रोपोनिक्स और ब्लॉकचेन आधारित कृषि मार्केटप्लेस जैसे नवाचार आकर्षण का केंद्र रहे। इसके अलावा पराली से पोषक पशु आहार बनाने और अदरक व हल्दी की पत्तियों से हर्बल उत्पाद तैयार करने जैसे समाधानों ने विशेषज्ञों को विशेष रूप से प्रभावित किया।
बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर के सबौर एग्री इंक्यूबेटर्स
बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर के सबौर एग्री इंक्यूबेटर्स

बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने इस सफलता पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधानों को प्रयोगशाला से निकालकर सीधे बाजार और खेतों तक पहुंचाना है। उन्होंने विश्वास जताया कि ये स्टार्टअप्स न केवल किसानों की आय दोगुनी करेंगे, बल्कि ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के व्यापक अवसर भी सृजित करेंगे।

निदेशक अनुसंधान और साबाग्रीस के नोडल अधिकारी डॉ. अनिल कुमार सिंह ने बताया कि यह अनुदान केवल वित्तीय सहायता नहीं है, बल्कि बिहार के कृषि पारिस्थितिकी तंत्र की राष्ट्रीय स्तर पर मिली स्वीकृति है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पीएम-आरकेवीवाई के तहत मिलने वाली यह राशि इन स्टार्टअप्स को अपने उत्पादों के व्यावसायीकरण और वैश्विक बाजार में पहुंच बनाने में संजीवनी का कार्य करेगी। यह पूरी पहल 'विकसित भारत-2047' और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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